गरीब बच्चों को मुफ्त पढ़ाने के लिए छोड़ दी नौकरी
समस्तीपुर : दुनिया में ऐसे शख्स बहुत कम मिलते है जो खुद के लिए नहीं दूसरों के लिए जीते हैं। ऐसे इंसान सबके लिए एक मिसाल बन जाते हैं। रोसड़ा प्रखंड के रहने वाले राजेश कुमार सुमन ऐसी शख्सियत हैं जो गरीब एवं मेधावी बच्चों को मुफ्त में शिक्षित करने में जुटी हुई हैं। वह इन बच्चों को उनके घर से बुलाकर शिक्षित करते हैं। सुमन इस काम में इस कदर जुटा हैं कि उन्होंने इसके लिए अपनी विदेश मंत्रालय की नौकरी तक छोड़ दिया। सुमन ने बताया कि वह पहले नौकरी करने के साथ ही अपने इस शौक को बीएसएस क्लब:-नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान को स्थापित कर पूरा करता था। बाद के वर्षो में अपनी नौकरी को छोड़ दिया और उन्होनें अपना पूरा समय ही गरीब बच्चों को पढ़ाने व समाज सेवा को देने का सोचा।
समस्तीपुर : दुनिया में ऐसे शख्स बहुत कम मिलते है जो खुद के लिए नहीं दूसरों के लिए जीते हैं। ऐसे इंसान सबके लिए एक मिसाल बन जाते हैं। रोसड़ा प्रखंड के रहने वाले राजेश कुमार सुमन ऐसी शख्सियत हैं जो गरीब एवं मेधावी बच्चों को मुफ्त में शिक्षित करने में जुटी हुई हैं। वह इन बच्चों को उनके घर से बुलाकर शिक्षित करते हैं। सुमन इस काम में इस कदर जुटा हैं कि उन्होंने इसके लिए अपनी विदेश मंत्रालय की नौकरी तक छोड़ दिया। सुमन ने बताया कि वह पहले नौकरी करने के साथ ही अपने इस शौक को बीएसएस क्लब:-नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान को स्थापित कर पूरा करता था। बाद के वर्षो में अपनी नौकरी को छोड़ दिया और उन्होनें अपना पूरा समय ही गरीब बच्चों को पढ़ाने व समाज सेवा को देने का सोचा।
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