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Saturday, 11 May 2019

जल प्रकृति की अनमोल धरोहर है : राजेश कुमार सुमन


जल प्रकृति की अनमोल धरोहर है। बिना पानी के जीवन संभव नहीं है। पीने के लिये शुद्ध जल हमारे लिये जरूरी है। क्योंकि स्वच्छ एवं सुरक्षित जल अच्छे स्वास्थ्य की कुंजी है।उक्त बातें पौधा वाले गुरुजी ट्रीमैन के नाम से विख्यात राजेश कुमार सुमन 12 मई 2019 को बीएसएस क्लब रोसड़ा(समस्तीपुर) बिहार में आयोजित " जल संरक्षण पर परिचर्चा" कार्यक्रम में बतौर मुख्य वक्ता के रूप में कहा।उन्होंने आगे संबोधन के कहा कि धरती के दो तिहाई हिस्से पर पानी भरा हुआ है। फिर भी पीने योग्य शुद्ध जल पृथ्वी पर उपलब्ध जल का मात्र एक प्रतिशत हिस्सा ही है। 97 प्रतिशत जल महासागर में खारे पानी के रूप में भरा हुआ है। शेष रहा दो प्रतिशत जल बर्फ के रूप में जमा है। आज समय है कि हम पानी की कीमत समझें। यदि जल व्यर्थ बहेगा तो आगे वाले समय में पानी की कमी एक महा संकट बन जाएगा। अब प्रश्न यह है कि क्या अब तक नगरों, महानगरों, गाँवों, ढाणियों में पेयजल का उचित व्यवस्था हो चुकी है? यदि नहीं तो आजादी के इतने वर्षों के बाद भी हम यह व्यवस्था क्यों नहीं कर पाए? गाँव की सरकार पंचायत, नगरों की नगरपालिका, राज्यों एवं केन्द्र की सरकारों ने इस प्राथमिक मसले को अब तक हल क्यों नहीं किया है? बढ़ता जल संकट आज लोगों को एक-एक घड़े शुद्ध पेयजल के लिये मीलों भटकना पड़ रहा है। जल के टैंकर और ट्रेन से जल प्राप्त करने के लिये घंटों कतार में खड़ा रहना पड़ता है। रोजमर्रा के कामकाज नहाने, कपड़े धोने, खाना बनाने, बर्तन साफ करने, उद्योग धंधा चलाने के लिये तो जल चाहिए वह कहाँ से लाए जबकि नदी, तालाब, ट्यूबवैल, हैण्डपम्प एवं कुएँ बावड़ियाँ सूख गए हैं। पशु-पक्षियों को भी पानी के लिये मीलों भटकना पड़ता है। पेड़-पौधे भी सूखते जा रहे हैं। जल की कमी से अनेक कारखाने बंद होने से लोग बेरोजगार होते जा रहे हैं। खेती-बाड़ी के लिये तो और भी अधिक पानी की जरूरत है परन्तु पानी नहीं मिलने से खेती-बाड़ी चौपट होती जा रही है। जल संकट हमारे पूरे दैनिक जीवन को बुरी तरह से प्रभावित करता है। इसलिये इस मसले पर प्राथमिकता से ध्यान दिए जाने की जरूरत है। जल संकट के लिये जिम्मेदार कौन? जल संकट तो हमारी भूलों और लापरवाहियों से ही उपजा है। हम अनावश्यक रूप से तथा अधिक मात्रा में जल का दोहन कर रहे हैं। दैनिक उपयोग में आवश्यकता से अधिक मात्रा में जल का अपव्यय करने की आदत ने जल संकट बढ़ा दिया है। बढ़ती जनसंख्या के कारण भी जल का उपभोग बढ़ता जा रहा है। खेती एवं उद्योगों में अधिक उत्पाद लेने की खातिर जल का उपभोग बढ़ा दिया है। जल स्रोतों से जल के उपभोक्ता तक पहुँच से पहले ही पाँचवा हिस्सा गटर में चला जाता है। वृक्षों की अंधाधुंध कटाई व वनों के लगातार घटने से वर्षा होने की अवधि व साथ ही वर्षा की मात्रा में भी कमी आ रही है। कुओं, नलकूपों, तालाबों से अन्धाधुन्ध जल दोहन के कारण भूजल में कमी आ गई है। धरती में जल स्तर निरन्तर नीचे जा रहा है। कल-कारखानों से निकले दूषित जल व शहरी क्षेत्रों के गटर एवं कूड़े-कचरे ने जलस्रोतों को प्रदूषित कर दिया है जिससे पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है। यह सब कुछ अनियन्त्रित मानवीय गतिविधियों के कारण ही हुआ है। इसका निराकरण भी मानव ही कर सकता है। जन भागीदारी से जल संरक्षण हमारे देश के पुरखों से हमें अनेक प्रकार के जलस्रोत विरासत में मिले हैं। यदि हमने इस विरासत को संभाल कर नहीं रखा तो आने वाली पीढ़ियाँ हमें माफ नहीं करेंगी। हमारे देश के गाँव-गाँव में परम्परागत कुएँ, बावड़ी व तालाब बने हुए हैं। पिछले वर्षों में लम्बे समय से हम इनकी अनदेखी करते आ रहे हैं। इन्हें या तो तोड़फोड़ दिया गया है या प्राकृतिक रूप से नष्ट हो गए हैं। आगे से इन जलस्रोतों की चिन्ता सभी मिलाकर करेंगे तभी जल संकट से निजात मिल सकेगी। हमने अपने ही स्वार्थ में इन्हेें उजाड़कर कंकरीट का जंगल बिछा दिया है। जनता ने जल पूर्ति की जिम्मेदारी अपने कंधों से उतारकर सरकार के कंधों पर रख दी है। जबकि सरकारें योजनाएँ बनाने तक सीमित हो जाती हैं क्योंकि इन्हें कारगर ढंग से लागू करने में लोगों के स्वार्थ आड़े आते हैं। गाँव-गाँव और शहर-शहर में बने हुए जलस्रोतों का पुनरुद्धार किया जाना आवश्यक है। मोहल्ले, गाँव, शहर जहाँ भी ऐसे स्रोत हैं वहाँ के लोग मिलकर इन जलस्रोतों की जिम्मेदारियाँ अपने ऊपर लें। मिलकर इनमें जमा कूड़े-कचरे, मिट्टी, कंकड़, झाड़-झंखर को हटाएँ। जलस्रोतों के जल मार्ग में आने वाले अवरोध व नाजायज कब्जे हटाएँ। जलस्रोतों के रखरखाव में अपनी व दूसरे लोगों की भागीदारी सुनिश्चित किए जाने की आवश्यकता है। अब तक जो भूलें हमने की है उनका समाधान भी हमें मिलजुल कर ही करना है। हम एक-एक मिलकर अनेक बन सकते हैं। जब इतने हाथ श्रमदान करेंगे तो जलस्रोत अवश्य साफ रहेंगे। उन्हें गंदा करने से भी बचाएँगे। इस कथन पर काम करना है साथी हाथ बटाना, एक अकेला थक जाएगा तो मिलकर बोझ उठाना। स्थानीय निकायों का दायित्व गाँवों में पंचायतें, शहरों में नगरपालिका एवं नगरों में नगर एवं महानगर निगम बने हुए हैं। उनको स्थानीय सरकार का अपना दायित्व समझना चाहिए। सभी लोगों को जल शुद्ध एवं पर्याप्त मात्रा में मिले इसका प्रबन्ध उन्हें करना है। इस मद में सभी सरकारी विभाग एवं स्थानीय स्वशासन की इकाइयाँ करोड़ों रुपयों का खर्चा प्रतिवर्ष दिखाती हैं तो जनता को उसका परिणाम देखने परखने का हक है। ये संस्थाएँ लोगों की भागीदारी से जल भण्डारण के लिये उपयुक्त व्यवस्था जैसे- कुएँ, तालाब, एनीकट, बाँध का निर्माण कराएँ एवं उनके रख-रखाव का ध्यान रखे। नदियों में गंदे नालों का पानी न जाने दें उन्हें शुद्ध रखने के सभी उपचार करें। उन्हें गंदा होने से बचाएँ, व्यर्थ में पानी खराब होने एवं अपव्यय करने के कारकों को दूर करें। पेड़ लगाने और उनकी सुरक्षा करने से हरियाली बढ़ेगी जिससे भूमि में पानी को रोकने में मदद मिलेगी। जल प्रकृति की देन है हमें इसका संग्रहण भी करना है, संयोजन भी करना है। इस पर हर व्यक्ति का बराबर का अधिकार है। चाहे वह किसी जाति, धर्म, सम्प्रदाय, क्षेत्र या पार्टी का हो। कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं में बबलू कुमार,सोनू कुमार,रिमझिम कुमारी,कंचन कुमारी,संगीता कुमारी,रूपम कुमारी,राहुल कुमार सहित कई गणमान्य लोग भी अपनी-अपनी बातों को रखा। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में स्कूली और काॅलेज के छात्र-छात्राएँ मौजूद थे।

Saturday, 2 March 2019

18 पौधरोपण करो और सरकारी नौकरी का मुफ्त कोचिंग करो


इंटरमीडिएट के परीक्षा दे चुके 40 छात्र-छात्राओं को सरकारी नौकरी के तैयारी के नाम पर अब 8 से 10 हजार रू. तक आर्थिक ठगी का शिकार नहीं होना पड़ेगा।ऐसे छात्र-छात्राओं को पर्यावरण प्रदूषण रूपी समस्या से भारत माता को आजाद कराने के लिए और पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए सिर्फ 18 पौधरोपण करना होगा।18 पौधरोपण करने वाले छात्र-छात्राओं को समस्तीपुर जिला के रोसड़ा स्थित ग्रीन पाठशाला बीएसएस क्लब द्वारा आगामी 11 मार्च 2019 सुबह 6 बजे से रेलवे,एसएससी,बिहार पुलिस,बिहार दरोगा,सीपीओ,केन्द्रीय सिपाही,बिहार एसएससी,बीपीएससी सहित अन्य प्रमुख प्रतियोगिता परीक्षाओं के लिए नि:शुल्क कोचिंग दिया जायेगा।यहां बच्चों को तब तक कोचिंग दिया जाता रहेगा जब तक उन्हें सरकारी नौकरी प्राप्त हो जाती है।नामांकन के लिए आवेदन 10 मार्च 2019 तक स्वीकार किया जायेगा।विशेष जानकारी के लिए आप 9576036317 पर संपर्क कर सकते हैं।ईमेल-rajeshsuman10@gmail.com है। बताते चलें कि बिहार बच्चों को सरकारी नौकरियों में उचित भागीदारी दिलाने के लिए रेलवे में टीटीई अशोक कुमार,पौधा वाले गुरु जी राजेश कुमार सुमन(विदेश मंत्रालय सहित भारत सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों में सेवा दे चुके हैं) के द्वारा ग्रीन पाठशाला बीएसएस क्लब का स्थापना वर्ष 2008 में किया गया था।स्थापना काल से अब तक अनवरत रूप में समाज के 3 हजार गरीब,दलित,वंचित,शोषित,दिव्यांग और बेटियों को विभिन्न प्रकार के सरकारी नौकरियों के तैयारी के लिए नि:शुल्क कोचिंग दिया गया है।यहां से नि:शुल्क शिक्षा ग्रहण करने वाले 400 छात्र-छात्राएं भारत सरकार और बिहार सरकार के विभिन्न छोटे-बड़े पदों पर नौकरी कर रहे हैं।

Sunday, 23 December 2018

पौधा वाले गुरुजी राजेश कुमार सुमन गुरु दक्षिणा में पर्यावरण संरक्षण के लिए बच्चों से लेते हैं पौधा

पर्यावरण आज पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय है। बढ़ती हुई कार्बन डाई-ऑक्साइड और धरती के बढ़ते हुए तापमान ने पूरी दुनिया को चिंता में डाले हुए है। ग्लोबल वॉर्मिंग से दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए हर तरफ पेड़ लगाने की बात होती है, लेकिन दुनिया में ऐसे गिन चुने ही लोग हैं जो इस बात की गंभीरता समझते हैं उन्हीं में एक समस्तीपुर जिला के रोसड़ा प्रखंड अन्तर्गत ढरहा गांव के किसान श्री राम चरित्र महतो के बड़े पुत्र शिक्षक राजेश कुमार सुमन भी हैं जिन्हें लोग प्यार से 'पौधा वाले गुरुजी' या फिर ट्रीमैन के नाम से भी पुकारते हैं। 'पौधा वाले गुरुजी' (राजेश कुमार सुमन) बिना किसी सरकारी मदद के पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए "सेल्फी विथ ट्री" मुहीम के माध्यम से बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर हरियाली फैलाने का काम कर रहे हैं।उनकी सुबह की शुरुआत ही पौधारोपण से होती है। अगर वह चौबीस घंटे में एक पौधा नहीं रोपते हैं तो उन्हें चैन नहीं आता। हालांकि राजेश कुमार सुमन जब छठी कक्षा में पढ़ते थे उसी समय से पौधारोपण करते हैं,लेकिन सघन पौधारोपण अभियान पिछले चार वर्षों से करते आ रहे हैं। बताते चलें कि पौधा वाले गुरु जी राजेश कुमार सुमन "बीएसएस क्लब" के माध्यम से पिछले 10 वर्षों से बेटियों,दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दे रहे हैं और मुफ्त शिक्षा के बदले राजेश कुमार सुमन सुमन गुरु दक्षिणा के रूप में पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रत्येक बच्चों से एक-एक पौधा रोपण करवाते हैं।इस तरह से अब तक लाखों पौधारोपण करवा चुके हैं।इसके अलावे राजेश कुमार सुमन जहाँ कही भी शादी-समारोह,जन्मदिन,शादी के सालगिरह,जनेऊ व मुंडन जैसे मांगलिक अनुष्ठानों के आयोजन के अवसर पर गिफ्ट या चुमावन के बदले इको फ्रेंडली गिफ्ट के रूप पौधा भेंट करते हैं।राजेश कुमार सुमन अपने जन्मदिन और शादी के सालगिरह पर पौधारोपण करने के साथ-साथ विभिन्न महापुरुषों के जयंती व पुण्यतिथि,प्रमुख त्योहारों,प्रमुख दिवसों,विश्व जल दिवस,विश्व पृथ्वी दिवस,विश्व पर्यावरण दिवस जैसे आयोजनों पर विशेष अभियान चलाकर पौधारोपण चलते हैं और संगोष्ठियों -रैली के माध्यम से आमजनों को जागरूक करते हैं।बच्चों को पढ़ाने के बाद राजेश कुमार सुमन के पास जो भी वक्त बचता है उसे वह प्रकृति की सेवा में लगा देते हैं।वे जहाँ बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देते वहां के बगीचे में पचास से अधिक प्रजाति के पेड़-पौधे देखने को मिल जाएंगे। वह लोगों को पौधारोपण के लिए जागरूक करने के साथ-साथ अपने पास से पौधे भी मुफ्त में देते हैं।राजेश कुमार सुमन पर्यावरण संरक्षण के लिए न केवल अपना कीमती वक्त खर्च करते हैं बल्कि अपनी कमाई का 60 प्रतिशत हिस्सा भी इसके लिए लगाते हैं। पर्यावरण के लिए उनके इसी जुनून के चलते लोगों ने अब उन्हें पौधा वाले गुरुजी या फिर ट्रीमैन कहना शुरू कर दिया है।पौधा वाले गुरुजी राजेश कुमार सुमन को शिक्षा व पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए बिहार उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी जी, बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी,राजीव गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय अरूणाचल प्रदेश के कुलपति डा. साकेत कुशवाहा, प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण कमिटी , बिधान परिषद पटना(बिहार) के अध्यक्ष प्रो.नवल किशोर यादव, समस्तीपुर जिलाधिकारी प्रणव कुमार,मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक श्री उपेन्द्र शर्मा ,दिल्ली विश्वविद्यालय,प्रेस क्लब लखनऊ सहित कई स्वयंसेवी संस्थाएं समानित कर चुकी हैं।

Monday, 17 December 2018

शादी में पौधारोपण एक जन-आंदोलन होना चाहिए-राम बालक सिंह

15 दिसंबर 2018 को देर संध्या समस्तीपुर जिला अन्तर्गत विभूतिपुर प्रखंड के ऐतिहासिक व क्रांतिकारी पतैलिया की धरती पर श्री राम कुमार चौरसिया जी के पुत्र नितेश के शादी के उपरांत के वर-वधू स्वागत समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए चलाये जा "सेल्फी विथ ट्री" मुहीम के पूरी टीम के साथ मुहीम के संस्थापक पौधा वाले गुरु जी ट्रीमैन Rajesh Kumar Suman पहुंचे ।पूर्व सुनियोजित कार्यक्रम के तहत विभूतिपुर विधानसभा के लोकप्रिय विधायक माननीय राम बालक सिंह जी,प्रखंड प्रमुख महोदया श्रीमती निर्मला किशोरजी,युवातुर्क समाजसेवी श्याम किशोर कुशवाहा जी व अन्य प्रमुख गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति में पौधा वाले गुरु जी ट्रीमैन राजेश कुमार सुमन नें वर-वधू को कृत्रिम उपहार के बदले इको फ्रेंडली उपहार के रूप में आम का पौधा भेंट कर उज्जवल भविष्य की कामना किया।तत्पश्चात ग्रामीणों के बीच वर-वधू एवं अतिथियों के द्वारा प्रीति भोज में शामिल लोगों के बीच आम और अमरूद का पौधा वितरित किया गया और वर-वधू के द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प भी लिया गया। वर-वधू स्वागत समारोह के दौरान पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए पौधारोपण वितरण और पौधारोपण ग्रामीणों के बीच कौतूहल का विषय बना हुआ था।होना भी लाजिमी था क्षेत्र में पहली बार इस तरह के अनोखे कार्यक्रम का आयोजन किया जा यहा हो।कार्यक्रम को देखने के लिए काफी संख्या में बुजुर्ग,महिलाएं,बच्चे पहुंचे हुए।सभी इस अनोखे कार्यक्रम का खूब प्रशंसा कर रहे थे।कुछ बुजुर्ग तो यहा तक आपस में बात कर रहे थे काश हमारे जमाने में भी इस का कार्यक्रम होता तो हमलोग भी पौधारोपण करते और उस पेड़ का फल पूरे परिवार के साथ चखते और नये पीढियों को बताते कि शादी के अवसर पर पौधारोपण किया था। जिसका फल आज हमलोग सभी मिलकर खा रहे हैं। माननीय विधायक जी अपने उद्बोधन के दौरान आमजनों से भी कहा कि "सेल्फी विथ ट्री" अभियान से प्रेरणा लेकर शादी,जन्मदिन व शादी के सालगिरह जैसे मांगलिक अनुष्ठानों के आयोजन के अवसर पर पौधारोपण व वितरण जन आन्दोलन बनते जा रहा है। प्रखंड प्रमुख श्रीमती निर्मला किशोर नें उपस्थित जन समूह को संबोधित करते हुए कही कि जीवन भर मुफ्त में आॅक्सीजन देने वाले पेड़ को हम महत्व नहीं देते हैं और वहीं कृत्रिम आॅक्सीजन देने वाले डाॅक्टर को हम कद्र करते हैं। मनुष्य को स्वस्थ्य रहने के लिए घर में एसी लगाने के बदले अपने घर-आंगन में कम से कम एक पौधारोपण जरूर करना चाहिए।जिससे प्राकृतिक एसी का मजा आयेगा।बेटियों को एसी,फ्रीज व वांशिग मशीन के बदले पौधा ही देना चाहिए। एसी,फ्रीज और वाशिंग मशीन से सीएफसी जैसे खतरनाक निकलती है,जो ओजोन परत को नुकसान पहुंचा रही है।ओजोन परत में छेद होने से परा-बैंगनी किरण प्रत्यक्ष रूप से पृथ्वी पर विपुल मात्रा में पहुंचेगी,जिससे हमें त्वचा कैंसर जैसी घातक बीमारी हो सकती है।इसलिए अधिक से अधिक पौधारोपण और कम से एसी,फ्रीज और वाशिंग मशीन का उपयोग करना चाहिए।उन्होंने यह भी कही की विभिन्न कार्यक्रम उद्घाटन व शिलान्यास के समय भी फीता काटने के साथ-साथ पौधारोपण करना चाहिए।पौधा वाले गुरुजी ट्रीमैन राजेश कुमार सुमन ने उपस्थित ग्रामीणों और अतिथियों को संबोधित करते हुए कहा कि आज हमलोगों को पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए अधिक से अधिक पौधारोपण करने की आवश्यकता है।बिहार में 9.5 प्रतिशत और देश में 24 प्रतिशत मात्र वन है जबकि पर्यावरण संरक्षण के लिए कम से कम 33 प्रतिशत वन होना जरूरी है।इसलिए समय रहते हमलोग अधिक से अधिक पौधारोपण नहीं करेंगे तो दिल्ली जैसे हालात बिहार में भी हो सकता है और हमारे आने वाले पीढी विभिन्न प्रकार के बिमारियों से ग्रसित हो जायेंगे व घर बाहर निकलने पर आॅक्सीज का सिलिंडर साथ में रखना होगा।साथ-साथ सभी ग्रामीणों से भी जन्मदिन व शादी के सालगिरह पर पर केक काटने के साथ-साथ पौधारोपण करने के लिए आग्रह किया।संबोधन के दौरान उन्होंने कहा की आज स्मार्ट सिटी के साथ-साथ इको फ्रेंडली सिटी बनाने पर जोर देना चाहिए और आगे कहा कि 18 पेड़ जितना आॅक्सीजन देती है,उतना आॅक्सीजन एक मनुष्य अपने पूरे जीवन काल में ग्रहण करता है। दूसरी ओर एक पेड़ पूरे जीवन काल में 42 लाख रू. के बराबर हमें आॅक्सीजन प्रदान करती है और 38 लाख रू. के बराबर वायु प्रदूषण से हमें बचाती है।आज हमलोग शहरीकरण के विस्तार हेतु अंधाधुंध वनों का कटाई कर रहें हैं।अगर इसी तरह से कटाई जारी रहेगा तो आनेवाले 30 वर्षों में वैश्विक तापमान में औसतन 2 डिग्री सेल्सियस बढ़ने की उम्मीद है,जिससे ग्लेशियर पिघलेगा और पानी नदी के माध्यम से समुद्र में पहुंचेगा तो परिणामस्वरूप समुद्र का जल स्तर बढेगा और निचले तबके के तटीय शहर व सुन्दर वन का डेल्टा सहित छोटे-छोटे आइसलैंड को समुद्र अपने आगोश में ले लेगी। श्याम किशोर कुशवाहा नें अपने संबोधन के दौरान कहा कि हिन्दू धर्म में बेटी के शादी से पहले फलदान कार्यक्रम में लड़की पक्ष वाले लड़के पक्ष वाले को अपने सामर्थ्य के अनुसार 5 विभिन्न प्रकार के फल भेंट करते हैं जो हमारी बेटी उस फल को खा भी नहीं पाती है। उस फल को होने वाले दामाद,उनके माता-पिता,भाई-बहन खाकर खत्म कर देते हैं।अगर हम बेटियों के उक्त फलदान कार्यक्रम में फलों के साथ-साथ 5 विभिन्न प्रकार पौधा भी दें और सुरक्षित स्थान पर पौधारोपण करवा दिया जाय तो आने वाले 4-5 वर्षों में फल फलेगा तो बेटी,दामाद,नाति-नतिनी सभी एक साथ बैठकर फल खायेंगे और हमारा पर्यावरण भी संतुलित रहेगा।

Saturday, 13 October 2018

ट्रीमैन उप मुख्यमंत्री से मिलकर पर्यावरण बचाने को दिया 8 सूत्री सुझाव

बिहार के माननीय उप मुख्यमंत्री सह पर्यावरण,वन व जलवायु परिवर्तन मंत्री बिहार श्री सुशील कुमार मोदी जी के नेतृत्व में पुराने सचिवालय में पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए चलाये जा रहे "सेल्फी विद् ट्री" मुहीम के प्रणेता ट्रीमैन राजेश कुमार सुमन, सह प्रणेता व किसान के लाल रामलाल प्रसाद और इंजिनीयर अभिषेक कुशवाहा के साथ एक विशेष बैठक का आयोजन किया। बैठक के दौरान सबसे पहले सदस्यों ने "सेल्फी विद् ट्री" मुहीम के उद्देश्यों और मिशन से उप मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया।पर्यावरण को बचाने के लिए हमलोगों नें 8 महत्वपूर्ण बिन्दुओं को सरकार को अमलीजामा पहनाने के लिए एक स्मारपत्र सौंपा। 8 प्रमुख सुझाव निम्नलिखित है- 1.गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने जाने वाले तमाम स्थल पर ध्वजारोहण के उपरांत राष्ट्रीय वृक्ष बरगद का रोपण होना चाहिए। इसके अलावे विभिन्न कार्यक्रमों का उद्घाटन या शिल्यान्यास के दौरान फीता काटने या दीप प्रज्ज्वलित करने के बदले पौधारोपण कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ होना चाहिए।विभिन्न महापुरुषों के जयंती व पुण्यतिथि,शहीदों के शहादत पर उनके याद में पौधारोपण किया जाना चाहिए। 2.विभिन्न विश्वविद्यालय के द्वारा आयोजित दीक्षांत समारोह के दौरान छात्र-छात्राओं को प्रमाण-पत्र,मेडल के साथ-साथ एक-एक पौधा भी दिया जाय। 3.विभिन्न स्कूल-काॅलेजों में सत्रारम्भ व विदाई समारोह के दौरान फूल-माला के बदले फलदार पेड़ देकर विदाई करने की परम्परा की शुरुआत किया जाना चाहिए। 4.जन्मदिन व शादी के सालगिरह पर केक काटने के बजाय पौधारोपण कर इको फ्रेंडली जन्मदिन मनाने का बढावा दिया जाय।जिससे वाले पीढियों में पौधारोपण कर जन्मदिन या फिर शादी के सालगिरह मनाने की परंपरा विकसित हो जाय। 5.शादी से पहले फलदान कार्यक्रम में 5 विभिन्न प्रकार के फल देने के बदले 5 विभिन्न प्रकार के फलदार पौधा देने के लिए बढावा दिया जाय। जिससे आने वाले समय में एक परम्परा बन जाय।चूंकि शादी से पहले फलदान कार्यक्रम आयोजित होता है,जिसमें लड़की पक्ष वाले लड़के पक्ष वाले को अपने सामर्थ्य के अनुसार 5 विभिन्न प्रकार के फल भेंट करते हैं,जो उनकी बेटी खा नहीं पाती है। उनके होने वाले दमाद,दमाद की माॅ,पिता और भाई-बहन फल खाकर खत्म कर देते हैं।अगर फल के बदले पौधा दिया जाता है तब वो पौधारोपण कर दिया जायेगा। आने वाले चार-पांच वर्ष में पेड़ से फल फलेगा तो बेटी,दमाद और नाति-नतिनी सब मिलकर फल खायेंगे और पर्यावरण संतुलन भी बना रहेगा। 6.विभिन्न शादी-समारोह,मुंडन,जनेऊ,छट्ठी,शादी के सालगिरह,जन्मदिन जैसे मांगलिक अनुष्ठानो के आयोजन के पर महंगे गिफ्ट या चुमावन के बदले इको फ्रेंडली गिफ्ट के रूप पौधा देने के लिए बढावा दिया जाना चाहिए। 7.राजनेताओं व उच्चाधिकारियों से शिष्टाचार मुलाकात के दौरान बुके के बदले पौधा भेंट करने की परम्परा की शुरुआत किया जाना चाहिए।इसके लिए उच्चाधिकारियों व राजनेताओं को अपने आवास या फिर कार्यालय में नेमप्लेट में इसका उल्लेख किया जाना चाहिए। 8.सरकार के द्वारा हर आंगन या दरवाजा पर वृक्ष योजना का शुरुआत किया जाना चाहिए।

Sunday, 7 October 2018

ट्रीमैन राजेश कुमार सुमन को उप-मुख्यमंत्री नें किया सम्मानित

05 अक्तूबर को डाॅल्फिन दिवस के अवसर पर वन,पर्यावरण व जलवायु मंत्रालय बिहार मंत्रालय सरकार के द्वारा पटना के संजय गाँधी उद्यान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए "सेल्फी विद् ट्री" अभियान के प्रणेता पौधा वाले गुरु जी ट्रीमैन के नाम से प्रसिद्ध राजेश कुमार सुमन को बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी सम्मानित नें सम्मानित किया। उक्त कार्यक्रम में राजेश कुमार सुमन के अलावे सितामढी के जिलाधिकारी डा. रंजीत कुमार सिंह और कैमूर के जिलाधिकारी नवल चौधरी को भी सम्मानित किया गया। बताते चलें कि पर्यावरण आज पूरी दुनिया के लिए चर्चा का विषय है। बढ़ती हुई कार्बन डाई-ऑक्साइड और धरती के बढ़ते हुए तापमान ने पूरी दुनिया को चिंता में डाले हुए है। ग्लोबल वॉर्मिंग से दुनिया को सुरक्षित रखने के लिए हर तरफ पेड़ लगाने की बात होती है, लेकिन दुनिया में ऐसे गिन चुने ही लोग हैं जो इस बात की गंभीरता समझते हैं उन्हीं में एक समस्तीपुर जिला के रोसड़ा प्रखंड अन्तर्गत ढरहा गांव के किसान श्री राम चरित्र महतो के बड़े पुत्र शिक्षक राजेश कुमार सुमन भी हैं जिन्हें लोग प्यार से 'पौधा वाले गुरुजी' या फिर ट्रीमैन के नाम से भी पुकारते हैं। 'पौधा वाले गुरुजी' (राजेश कुमार सुमन) बिना किसी सरकारी मदद के बड़े पैमाने पर पेड़ लगाकर हरियाली फैलाने का काम कर रहे हैं।उनकी सुबह की शुरुआत ही पौधारोपण से होती है। अगर वह चौबीस घंटे में एक पौधा नहीं रोपते हैं तो उन्हें चैन नहीं आता। हालांकि राजेश कुमार सुमन जब छठी कक्षा में पढ़ते थे उसी समय से पौधारोपण करते हैं,लेकिन सघन पौधारोपण अभियान पिछले चार वर्षों से करते आ रहे हैं। बताते चलें कि पौधा वाले गुरु जी राजेश कुमार सुमन बीएसएस क्लब के माध्यम से पिछले 10 वर्षों से बेटियों,दिव्यांग और आर्थिक रूप से कमजोर बच्चों को मुफ्त में शिक्षा दे रहे हैं और मुफ्त शिक्षा के बदले राजेश कुमार सुमन सुमन गुरु दक्षिणा के रूप में पर्यावरण संरक्षण व संवर्धन के लिए प्रत्येक बच्चों से एक-एक पौधा रोपण करवाते हैं।इस तरह से अब तक लाखों पौधारोपण करवा चुके हैं।इसके अलावे राजेश कुमार सुमन जहाँ कही भी शादी-समारोह,जन्मदिन,शादी के सालगिरह,जनेऊ व मुंडन जैसे मांगलिक अनुष्ठानों के आयोजन के अवसर पर गिफ्ट या चुमावन के बदले इको फ्रेंडली गिफ्ट के रूप पौधा भेंट करते हैं।राजेश कुमार सुमन अपने जन्मदिन और शादी के सालगिरह पर पौधारोपण करने के साथ-साथ विभिन्न महापुरुषों के जयंती व पुण्यतिथि,प्रमुख त्योहारों,प्रमुख दिवसों,विश्व जल दिवस,विश्व पृथ्वी दिवस,विश्व पर्यावरण दिवस जैसे आयोजनों पर विशेष अभियान चलाकर पौधारोपण चलते हैं और संगोष्ठियों -रैली के माध्यम से आमजनों को जागरूक करते हैं।बच्चों को पढ़ाने के बाद राजेश कुमार सुमन के पास जो भी वक्त बचता है उसे वह प्रकृति की सेवा में लगा देते हैं।वे जहाँ बच्चों को मुफ्त में शिक्षा देते वहां के बगीचे में पचास से अधिक प्रजाति के पेड़-पौधे देखने को मिल जाएंगे। वह लोगों को पौधारोपण के लिए जागरूक करने के साथ-साथ अपने पास से पौधे भी मुफ्त में देते हैं।राजेश कुमार सुमन पर्यावरण संरक्षण के लिए न केवल अपना कीमती वक्त खर्च करते हैं बल्कि अपनी कमाई का 60 प्रतिशत हिस्सा भी इसके लिए लगाते हैं। पर्यावरण के लिए उनके इसी जुनून के चलते लोगों ने अब उन्हें पौधा वाले गुरुजी या फिर ट्रीमैन कहना शुरू कर दिया है। इससे पहले भी पौधा वाले गुरुजी राजेश कुमार सुमन को बिहार आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के उपाध्यक्ष व्यास जी,राजीव गाँधी केन्द्रीय विश्वविद्यालय अरूणाचल प्रदेश के कुलपति डा. कुशवाहा, प्रश्न एवं ध्यानाकर्षण कमिटी , बिधान परिषद पटना(बिहार) के अध्यक्ष प्रो.नवल किशोर यादव, समस्तीपुर जिलाधिकारी प्रणव कुमार,मोतिहारी के पुलिस अधीक्षक,दिल्ली विश्वविद्यालय सहित कई स्वयंसेवी संस्थाएं समानित कर चुकी हैं।

Friday, 11 August 2017

जैसे जैसे मेरी उम्र में वृद्धि होती गई, मुझे समझ आती गई कि अगर मैं Rs.3000 की घड़ी पहनू या Rs.30000 की दोनों समय एक जैसा ही बताएंगी..! मेरे पास Rs.3000 का बैग हो या Rs.30000 का, इसके अंदर के सामान मे कोई परिवर्तन नहीं होंगा। ! मैं 300 गज के मकान में रहूं या 3000 गज के मकान में, तन्हाई का एहसास एक जैसा ही होगा।! आखिर में मुझे यह भी पता चला कि यदि मैं बिजनेस क्लास में यात्रा करू या इक्नामी क्लास में अपनी मंजिल पर उसी नियत समय पर ही पहुँचूँगा. इसलिए अपने बच्चों को अमीर होने के लिए प्रोत्साहित मत करो बल्कि उन्हें यह सिखाओ कि वे खुश कैसे रह सकते हैं और जब बड़े हों, तो चीजों के महत्व को देखें उसकी कीमत को नहीं .... दिल को दुनिया से न लगाएं क्योंकि वह नश्वर है, बल्कि धर्म से लगाओ क्योंकि वही बाकी रहने वाली है... फ्रांस के एक वाणिज्य मंत्री का कहना था ब्रांडेड चीजें व्यापारिक दुनिया का सबसे बड़ा झूठ होती हैं जिनका असल उद्देश्य तो अमीरों से पैसा निकालना होता है लेकिन गरीब इससे बहुत ज्यादा प्रभावित होते हैं. क्या यह आवश्यक है कि मैं Iphone लेकर चलूं फिरू ताकि लोग मुझे बुद्धिमान और समझदार मानें? क्या यह आवश्यक है कि मैं रोजाना Mac या Kfc में खाऊँ ताकि लोग यह न समझें कि मैं कंजूस हूँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं प्रतिदिन दोस्तों के साथ उठक बैठक Downtown Cafe पर जाकर लगाया करूँ ताकि लोग यह समझें कि मैं एक रईस परिवार से हूँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं Gucci, Lacoste, Adidas या Nike के कपड़े पहनूं ताकि जेंटलमैन कहलाया जाऊँ? क्या यह आवश्यक है कि मैं अपनी हर बात में दो चार अंग्रेजी शब्द शामिल करूँ ताकि सभ्य कहलाऊं? क्या यह आवश्यक है कि मैं Adele या Rihanna को सुनूँ ताकि साबित कर सकूँ कि मैं विकसित हो चुका हूँ? नहीं यार !!! मेरे कपड़े तो आम दुकानों से खरीदे हुए होते हैं, दोस्तों के साथ किसी ढाबे पर भी बैठ जाता हूँ, भुख लगे तो किसी ठेले से ले कर खाने मे भी कोई अपमान नहीं समझता, अपनी सीधी सादी भाषा मे बोलता हूँ। चाहूँ तो वह सब कर सकता हूँ जो ऊपर लिखा है लेकिन .... मैंने ऐसे लोग भी देखे हैं जो मेरी Adidas से खरीदी गई एक कमीज की कीमत में पूरे सप्ताह भर का राशन ले सकते हैं। मैंने ऐसे परिवार भी देखे हैं जो मेरे एक Mac बर्गर की कीमत में सारे घर का खाना बना सकते हैं। बस मैंने यहाँ यह रहस्य पाया है कि पैसा ही सब कुछ नहीं है जो लोग किसी की बाहरी हालत से उसकी कीमत लगाते हैं वह तुरंत अपना इलाज करवाएं। मानव मूल की असली कीमत उसकी नैतिकता, व्यवहार, मेलजोल का तरीका, सुल्ह-रहमी, सहानुभूति और भाईचारा है, ना कि उसकी मोजुदा शक्ल और सूरत... !!!