बीएसएस क्लब में निर्धन छात्रों को दी जा रही है नि: शुल्क कोचिंग
बीएसएस क्लब:-नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान रोसड़ा,समस्तीपुर में निर्धन छात्रों को एसएससी,नेट, बैंक, रेलवे आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की नि: शुल्क कोचिंग दी जा रही है। सामान्य जाति के छात्रों सहित सभी जाति के छात्र इस कोचिंग में प्रवेश ले सकते हैं। जिले के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए अब पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा की शरण लेते थे कारण था कि यहां पर कोई ऐसा संस्थान नहीं था जहां पर प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग हासिल की जा सके लेकिन अब मायूस होने की जरूरत नहीं है। बीएसएस क्लब ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अपने द्वार खोल दिए है। क्लब के द्वारा एक नि: शुल्क कोचिंग सेंटर की स्थापना की गई है। यहाँ बिना शुल्क की कोचिंग चालू की गई है। इसमें सकलांग और विकलांग सभी प्रकार के छात्र-छात्रा प्रवेश ले सकते हैं।
कोचिंग में एसएससी,रेलवें,नेट, जेआरएफ, बैंक, टीईटी, पीजीटी आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ रिमेडियल विषय रखा गया है। क्षेत्र की गरीबी को देखते हुए नि: शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। यहां पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन अधिकांश छात्र गरीबी के कारण बाहर नहीं जा पाते हैं और उनकी प्रतिभा यहीं पर मर जाती है।
बीएसएस क्लब:-नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान रोसड़ा,समस्तीपुर में निर्धन छात्रों को एसएससी,नेट, बैंक, रेलवे आदि प्रतियोगी परीक्षाओं की नि: शुल्क कोचिंग दी जा रही है। सामान्य जाति के छात्रों सहित सभी जाति के छात्र इस कोचिंग में प्रवेश ले सकते हैं। जिले के छात्र-छात्राएं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों के लिए अब पटना, मुजफ्फरपुर और दरभंगा की शरण लेते थे कारण था कि यहां पर कोई ऐसा संस्थान नहीं था जहां पर प्रतियोगी परीक्षा की कोचिंग हासिल की जा सके लेकिन अब मायूस होने की जरूरत नहीं है। बीएसएस क्लब ने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वालों के लिए अपने द्वार खोल दिए है। क्लब के द्वारा एक नि: शुल्क कोचिंग सेंटर की स्थापना की गई है। यहाँ बिना शुल्क की कोचिंग चालू की गई है। इसमें सकलांग और विकलांग सभी प्रकार के छात्र-छात्रा प्रवेश ले सकते हैं।
कोचिंग में एसएससी,रेलवें,नेट, जेआरएफ, बैंक, टीईटी, पीजीटी आदि प्रतियोगी परीक्षाओं के साथ रिमेडियल विषय रखा गया है। क्षेत्र की गरीबी को देखते हुए नि: शुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। यहां पर प्रतिभाओं की कमी नहीं है लेकिन अधिकांश छात्र गरीबी के कारण बाहर नहीं जा पाते हैं और उनकी प्रतिभा यहीं पर मर जाती है।
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