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Friday, 3 June 2016

300 से ज्यादा छात्रों को दिखाई सफलता की राह, सुधार रहे गरीब विद्यार्थियों का जीवन



समस्तीपुर. जिले के गरीब विद्यार्थियों को तरासने में बीएसएस क्लब:-नि:शुल्क शैक्षणिक संस्थान की भूमिका अहम रही है। पांचूपुर, रोसड़ा में एक शेड में 8 वर्षों से संचालित यह संस्थान अब तक 300 से ज्यादा विद्यार्थियों की जिंदगी संवार चुकी है। सफलता की कहानी लिखने वाले ज्यादातर विद्यार्थी मध्यम या गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन करने वाले परिवार से हैं। जिला में यह क्लब युवाओं के बीच शिक्षा और रोजगार का अलख जगा रही है। संस्थान छात्रों को नि:शुल्क शिक्षा प्रदान करती है।

ऐसे हुआ क्लब का गठन

रोसड़ा के आसपास निम्न मध्यम वर्ग अथवा दिहाड़ी मजदूरी करने वालों की संख्या है। इन मेहनतकश लोगों के बच्चों में छोटी ही सही सरकारी अथवा रेलवे,एसएससी व बैंक में नौकरी करने की ललक थी। लेकिन आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण ज्यादातर परिवार बच्चों को पढ़ाने  में असमर्थ थे। इसी बात से प्रेरित होकर कुछ छात्रों ने एक संस्था गठित करने के बारे में सोचा, जिसमें पढ़ने वाले और पढ़ाने वाले दोनों हों। वर्ष 2008 को बीएसएस क्लब वजूद में आई।

गरीब छात्रों की जिंदगी संवारना मकसद

निजी कोचिंग संस्थानों ने पढ़ाई को व्यापार बना दिया है। फीस ज्यादा होने के कारण इन संस्थानों में गरीब विद्यार्थी पढ़ाई नहीं कर सकते। बाजारीकरण के दौर में छात्र सामूहिक रूप से तैयारी करते हैं। यहां का अनुशासन भी अनूठा है। 8 साल में इस कोचिंग संस्थान से लगभग 300 छात्र -छात्राएं सरकारी व बैंकों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल हुए हैं। गरीब विद्यार्थियों की मदद कर उनके जीवन को सफल बनाना ही क्लब का मकसद है।

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